सरदार बघेल सिंह धालीवाल 

पंजाब में 12 ‘मिसलें’ होती थीं जिनमें 10 ‘मिसलें’ जाटों की थीं। करोडि़या मिसल के सरदार बघेलसिंह धालीवाल थे, जिन्होंने सन् 1790 में दिल्ली पर धावा बोल दिया और मुगलों की दिल्ली को जी भरकर लूटा और लालकिले पर जा धमका था, जिसकी तीस हजार फौज ने जहाँ कैम्प लगाया उसी जगह को आज तीस हजारी कहते हैं और आज वहीं दिल्ली का तीस हजारी कोर्ट है।

इसी वीर योद्धा बघेलसिंह ने इससे पहले सन् 1766 में लुटेरे अब्दाली को पंजाब में घायल कर दिया था और उसके चंगुल से हजारों हिन्दू ब्राह्मण बनिया राजपूत स्त्रियों को छुड़वाकर उसका कारवां लूटा। इतिहास गवाह है कि किसी भी विदेशी आक्रमणकारी को पंजाब के जाटों ने न तो आसानी से कभी उसे देश में घुसने दिया और ना ही कभी पूरे लूट के माल के साथ वापिस जाने दिया।
यह पंजाब के जाट वीरों का एक विशाल इतिहास है जो आज तक भारतीय इतिहास का हिस्सा नहीं बन पाया। इसी वीर योद्धा को आखिर में दिल्ली में मुगलों ने तीन लाख का नजराना भी दिया और इसी पैसे के बल पर सरदार बघेलसिंह धारीवाल ने दिल्ली में दो साल रहकर गुरुद्वारे बनवाये। दिल्ली में जितने भी प्राचीन गुरुद्वारे हैं वे सभी उन्हीं के बनवाये हुए हैं।

जय जट्ट पुरख ।।

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