आज का गोत्र/गोत: *भादू*

*भाईचारे की बात* आज का गोत्र/गोत: *भादू* पौराणिक साक्ष्य मानते हैं कि भादू महाभारत कालीन _भद्रक_ जाती के लोगों के वंशज हैं जो की जरासंध के प्रकोप से बचने के लिये पश्चिमी दिशा में पलायन कर गए थे। आधुनिक इतिहास के अनुसार, भादू जाट जांगल देश के भदावर प्रदेश पर राज करते थे और चौहानों के समर्थक रहे हैं। भदावर प्रदेश के शासक जाट क्षत्रिय समुदाय भादू, भदौरिया, भदौतिया इत्यादि इत्यादि नाम से प्रसिद्ध हुये। उत्तर काल में इन्होंने अजमेर मेरवार के कई इलाकों में भी राज किया था जो बाद में…

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आज का गोत्र/गोत: *नेहरा*

*भाईचारे की बात* आज का गोत्र/गोत: *नेहरा* नेहरा गोत्र नरहरि देव के वंशज हैं और सूर्यवंशी जाट हैं। नेहरा गोत्र सिंध प्रदेश (आज के झुंझनू के पास भी अब इसी नाम से एक पहाड़ी है) के पर्वत के नेहरा नाम के ही नाम पर पड़ा है। नेहरा जाटों के एक शाख अफगानिस्तान और ईरान में पाए जाने वाले नेहरोई clan से भी जोड़ी जाती है। जो इस बात का भी प्रमाण माना जाता है कि नेहरा भी कई अन्य जाट गोत्रो की तरह एक क्षत्रिय कौम है। पाणिनि ने कदाचित…

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आज का गोत्र/गोत: *कुल्हाड़ी/कुल्हरी*

*भाईचारे की बात* आज का गोत्र/गोत: *कुल्हाड़ी/कुल्हरी* पौराणिक मिथक है कि कुल्हरी जाट धृतराष्ट्र के पुत्र कुंडिक के वंशज हैं। दूसरा प्रचलित मत ये है कि कुल्हरी जाट राजा भट्टी के पौत्र खुल्लर राय के वंशज हैं। एक मत ये भी है कि कुल्हाड़ी हरियाणा के एक राजा की संतान हैं। ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर पता लगता है कि कुल्हरी जाट यौधेय वंशज हैं और मध्य काल में सिंध प्रदेश से migrate हो कर आज के राजस्थान में आ बसे थे। सबसे पहले ये माउंट आबू क्षेत्र में बसे…

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आज का गोत्र/गोत: *दूहन*

*भाईचारे की बात* आज का गोत्र/गोत: *दूहन* एक मत ये है कि दूहन गोत्र वैदिक काल की एक नदी के नाम से है। दूसरा नात ये है कि दूहन लोग द्रुघन नाम की जगह से आये हैं जिसका उल्लेख पाणिनि ने भी किया है। एक और नेट ये भी है कि दूहन वंश सिनसिनवार जाटो से निकला है। सिनसिनवार जाटो के राजा के बेटे दहन से भी इस गोत्र को जोड़ा जाता है। दुहनों के गांव GT रोड के आस पास बसे हैं और ये इस बात का प्रमाण हैं…

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आज का गोत्र/गोत: *दहिया*

*भाईचारे की बात* आज का गोत्र/गोत: *दहिया* दहिया गोत्र का उद्भव एक मत के अनुसार ऋषि दधीचि से तो दूसरा मत महान चंद्रवंशी सम्राट वीरभद्र के पौत्र दहीभद्र से जोड़ता है। आधुनिक काल में इसका उद्भव पृथ्वीराज चौहान की पूनिया गोत्र की रानी की इसी नाम से हुई संतान से जोड़ा जाता है। इतिहासकार जेम्स टोड के अनुसार दहिया मध्य एशिया में ऑक्सस नदी के आस पास पायी जाने वाली महाजाति थी जिसने डारिस और सिकंदर के बीच हुए युद्ध में भी वीरता पूर्वक भाग लिया था। उत्तर काल में…

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आज का गोत्र/गोत: * डूडी*

*भाईचारे की बात* आज का गोत्र/गोत: * डूडी* सबसे प्रचलित मत के अनुसार, डूडी जाटों का origin चौहान साम्राज्य के डूडी राजा यानि की दादा डेडराज से है। इतर नात ये हैं कि डूडी गिटार का नाम दूधी पेड़ से पड़ा है तो कोई ये मानता है कि डूडी गोत्र डूडा खेड़ा गांव से पड़ा है। कुछ लोगों का ये भी मानना है कि डूडी एक डूडा जाट नाम के व्यक्ति की संतान हैं।  इंदौर के पास एक 5वीं सदी के कांष्य लेख से डूडिका नाम का वर्णन मिलता है…

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आज का गोत्र/गोत: *खत्री*

*भाईचारे की बात* आज का गोत्र/गोत: *खत्री* राजतरंगिणी में खत्री लोगों को कश्मीर के राजा कैलाश का वंशज बताया गया है और ये लववंशी क्षत्रिय जाट हैं। कश्मीर में कैलाश राज्य के पतन के बाद खत्री समुदाय लाहौर आया और यहां से बाद में अन्य स्थानों पर गया। एक मत ये भी है कि खत्री ग्रीकों द्वारा वर्णित फारसी निवासी कैथरोई (Xathroi) लोग हैं जो कि संस्कृत में क्षत्री के समक्ष हैं।  लौर और खत्री एक ही गोत्र है । इसलिए दोनों गोत्र में शादी नही होती है। लववंशी क्षत्रिय…

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आज का गोत्र/गोत: *तेवतिया*

*भाईचारे की बात* आज का गोत्र/गोत: *तेवतिया* तेवतिया गोत्र के लोगों का मूल निवास आज के मुल्तान शहर में था और मुग़ल काल में ये गुड़गांव के पास आकर बस गए। एक अन्य कथा के अनुसार ये लोग मूलतः ईरान से हैं और फ़ारसी में तेवतिया शब्द का अर्थ है “अग्नि की देवी”। गुडगांव के ही पास (आज के फरीदाबाद जिले में), तेवतिया राजा ने आज के बल्लभगढ़ की स्थापना की और अपनी बेटी की शादी महाराजा सूरजमल से कर जाट एकता को बढावा दिया। फरीदाबाद के मशहूर राजा नहर…

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आज का गोत्र/गोत: *फोगाट/फगेड़िया*

*भाईचारे की बात* आज का गोत्र/गोत: *फोगाट/फगेड़िया* ऐसा माना जाता है कि फोगाट गोत्र चौहान वंश से आये हैं और इनका संबंध महान राजा पृथ्वी राज चौहान से है। बिल्हान सिंह नाम से एक वीर चौहान 12वी सदी में चरखी दादरी के पास के एक गांव में बसा और घास फूस की एक झोपड़ी बना के रहने लगा जिसे “फोग” कहते थे। और इस फोग में रहने वाले बाद में फोगाट कहलाये। दूसरी किंवदंती ये है कि फोगाट अफ़ग़ानिस्तान से आये हैं जहां आज भी फोग नाम का समुदाय है।…

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आज का गोत्र/गोत: *जाखड़*

*भाईचारे की बात* आज का गोत्र/गोत: *जाखड़* जाखड़ गोत्र के origin को लेकर भी कई कथाएं प्रचलित हैं। एक मत के अनुसार ये राजा जाखभद्र के वंशज हैं, तो दूसरा मत ये है कि जाखड़ महभारत कालीन जागुड लोगों के वंशज हैं। परंतु, सबसे प्रचलित लोककथा के अनुसार जाखड़ _दादा जाखु_ के वंशज हैं जो कि एक सरोहा क्षत्रिय थे। जाखू शब्द संस्कृत के यक्ष के तुल्य है, इसलिए यह भी माना जाता है कि जाखड़ों के पूर्वज यक्ष जाति से भी संबंध रखते हैं।  जाखड़ों का मध्य एशिया से…

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