गांव चाण्डी के गौरव सैनिक भागूराम जी फगौड़िया !

cialis side effects आपका जन्म 27 मई 1943 को मकराना के पास और हमारे पड़ोसी गांव चाण्डी में हुआ। आपके पिता का नाम चौधरी नरसीराम था। आपने ठीकठाक शिक्षा ग्रहण की थी। तत्पश्चात गांव के सबसे ज्यादा शिक्षित साथी बेगाराम की सलाह पर सेना में जाने का मन बनाया। आपका चयन सन् 1961 में थल सेना की जाट रेजिमेंट में हुआ। जहां आपने सन् 1978 तक अपनी सेवाएं दी। cocaine and cialis mix सन् 1962 (अरूणाचल प्रदेश) में चीन के साथ, तथा 1965 व 1971 (मिजो हिल्स पोस्ट) के युद्ध में वीरता के कई कारनामे रचे थे। जिसके चलते उन्हें दर्जनों सैना मैडल मिले थे। युद्धों के अलावा आपने 3 साल तक श्रीलंका व 1 साल बंग्लादेश में शांती सेना में भी काम किया था। जब आप शांति सेना के लिए श्रीलंका थे तब 3 साल तक घरवालों से संपर्क नहीं हो पाया। ऐसे में सैनिक परिवार ने आप को शहीद समझ लिया। लेकिन शांती सेना से वापस गांव लोटे तो तमाम गांव वालों की आंखे नम हो गई। और गाजे बाजे के साथ आपका जौरदार स्वागत किया गया था। आपने सन् 1978 तक देशसेवा में अपना जीवन समर्पित किया और आज 76 वर्ष की उम्र में भरा पूरा परिवार को छौड़कर कल मंगलवार को अंतिम सांस ली। सन् 1962 के चीन युद्ध में अरूणाचल प्रदेश में आपकी बटालियन के 14 सैनिक शहीद हुए थे। तब आपने व आपके एक और साथी ने गौली लगने के बावजूद संघर्ष किया और आखिर में अपनी पोस्ट को बचाने में कामयाब रहे। उनकी इस बहादुरी का जाट रेजिमेंट ने सम्मान किया। आज भी बरेली सेंटर के संग्रहालय में आपकी बहादुरी के कारनामे अंकित है। आप 31 मई 1978 को सेवानिवृत्ति लेके पैतृक गांव आकर बस गये। और खेती बाड़ी का काम करने लगे। इस दौरान गांव के युवाओं को अपने सैन्य जीवन की यादें सुनाया करते थे। तथा मार्गदर्शक बन कर सेना में जाने का साहस देते थे। उनकी प्रेरणा से चाण्डी व आसपास के गांवो के काफी युवाओं का सेना में चयन हुआ। जो कि गर्व की बात है। sildenafil 100mg सेवानिवृत्ति के पश्चात अनेक सैनिक सम्मान समारोह व सैनिक कल्याण बोर्ड द्वारा सम्मानित करने हेतू बुलाया गया मगर आप कभी शामिल नहीं हुए। वो बोलते थे मैने अपनी भारत मां की सेवा सेना में रहकर खूब की है। सरकार मुझे पेंशन देती है मेरे लिए इतना ही काफी है। मुझे और कोई सम्मान नहीं चाहिए। how to use sildenafil citrate tablets भारत भूमि के ऐसे जाबांज सिपाहियों को शत शत नमन करते हैं। आने वाली पीढियां आपकी सदैव कर्जदार रहेगी।

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